मिलिए राम भक्त डॉ.संदीप नेमा से जिन्होंने प्रभु राम जी के जन्म से लेकर उनके पट्टाभिषेक तक को किया हस्तलिखित लिपिबद्ध*

मिलिए राम भक्त डॉ.संदीप नेमा से जिन्होंने प्रभु राम जी के जन्म से लेकर उनके पट्टाभिषेक तक को किया हस्तलिखित लिपिबद्ध*
👉 *#Ramcharitmans के साथ-साथ सुंदरकांड रामरक्षा स्तोत्र का भी लेखन किया है डॉक्टर संदीप नेमा ने*
जबलपुर। *मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हमारे आराध्य हैं हमारे पूज्य हैं और अगर कहें रामचरितमानस उनके जीवन का सार है तो अति संयुक्ति नहीं होगी। वैसे तो भगवान राम को मानने वाले उनको पूजने वाले, *#Ramcharitmans को पढ़ने वाले करोड़ों लोग हैं,असंख्य लोग हैं। परंतु अभी तक एक बात और भी देखने सुनने और पढ़ने में आई है कि लोगों ने अनेक भाषाओं में रामचरितमानस का अनुवाद किया है और उसे प्रकाशित भी किया है।परंतु कहीं पर भी अपने हाथों से पूरे रामचरितमानस को अकेला ही लिखा हो हस्त लिपि से लिपिबद्ध किया हो तो ऐसे उदाहरण भारत में नगन्य ही देखने सुनने को मिले हैं। परंतु मध्य प्रदेश में आज तक ऐसा कोई उदाहरण न देखने में आया ना सुनने में आया ना पढ़ने में आया। *#Ramcharitmansको अपने हाथों से लिखने वाले 2 भक्त हैं जिनका उल्लेख अभी तक प्राप्त हुआ है जिनमें मुरादाबाद के अतुल कुमार प्रमुख हैं, जिन्होंने 1990 के दशक से लिखना शुरू किया और अपनी हस्तलिखित प्रति पूरी की एक ज्वेलर, जिन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर अपनी हस्तलिखित रामचरितमानस और चांदी का छत्र भेंट किया था, जिससे वे चर्चा में आए। साथ ही हैदराबाद के 92 वर्षीय पेरेपी मल्लिकार्जुन शर्मा भी हैं, जिन्होंने कई भाषाओं में रामायण लिखी है। पेरेपी मल्लिकार्जुन शर्मा (हैदराबाद): अपनी वृद्धावस्था (92 वर्ष) में भी, उन्होंने कई भाषाओं में रामायण लिखकर अपनी भक्ति और समर्पण दिखाया, जो एक बड़ी खबर बनी थी। इसके अलावा, तुलसीदास की मूल हस्तलिखित प्रति के कुछ अंश (जैसे तुलसी गुफा में मिले) भी मौजूद होने की बात कही जाती है, जो 16वीं सदी के हैं और आज भी भक्तों के लिए आस्था का केंद्र हैं।*
*परन्तु संस्कारधानी से प्रदेश की राजधानी तक रामचरित मानस को हस्तलिखित लिपिबद्ध करने का इतिहास ढूंढ़े नहीं मिला । सिवाय जबलपुर के एक मात्र डॉ. संदीप नेमा को छोड़कर संस्कारधानी जबलपुर के प्रतिष्ठित नागरिक,सेवाभावी, सहज़ सरल मिलनसार व्यक्तित्व,धर्मनिष्ठ पेशे से शिक्षक एवं सिद्ध श्री माँ दरवार के अनन्य भक्त डॉ. संदीप नेमा एक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्हें लोग संगीतमय श्री राम मानस मण्डल जाबालिपुरम्‌ के माध्यम से प्रभु भक्ति में, सराबोर करने वाले एवं बच्चो को धर्म कर्म, संस्कृति, सनातन सभ्यता संस्कार के साथ शिक्षा के तीन सोपान कक्षा, मंच, मैदान, को माध्यम से शिक्षण कार्य कर विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करवाने एक आदर्श शिक्षक के रूप मे जानते है। परन्तु डॉ. संदीप नेमा (शिक्षक ) का प्रभु श्री रामजी के प्रति समर्पण, *#Ramcharitmans के प्रति अटूट, श्रद्धा देखने को मिली जब उन्होंने 495 दिवस की अथक मेहनत परिश्रम से अपने आराध्य ब्रह्मवेत्ता सद्गुरूदेव अखण्ड मानस यज्ञ के प्रणेता पूज्य दादा भगवान संत श्री वीरेंद्र पुरी जी महाराज श्री के दिव्य प्रकाश एवं मानस तीर्थ बजरंग मठ सूपाताल जबलपुर के महंत पूज्य श्री विश्वनाथ जी पुरी महाराज पावन संरक्षण तथा श्रद्धेय दैवज्ञ श्री पूज्य गुरुजी पंडित अरुण शर्मा जी के शुभ मंगल आशीष सान्निध्य से अभिसिंचित होकर अपने ब्रह्मलीन पूज्य मातुश्री श्रीमती शशि प्रभा नेमा व ब्रह्मलीन पूज्य पिताश्री डॉ.रमेश नेमा”राजेश” द्वारा बाल्यकाल से प्राप्त शिक्षा,संस्कार एवं सीख व प्रेरणा से श्रीरामचरित मानस के सातों सोपान जिसमें प्रभु श्री रामजी के जन्म से लेकर उनके पट्टाभिषेक तक हस्तलिखित लिपिबद्ध किया ।* *तुलसीदास की मूल प्रति: राजापुर (तुलसीदास की जन्मस्थली) और अन्य स्थानों पर तुलसीदास जी द्वारा लिखित रामचरितमानस के कुछ हिस्सों (जैसे अयोध्याकाण्ड) को संरक्षित किया गया है, जिसे भक्त अद्भुत मानते हैं। पूर्व में पूरे भारत में जो 2 उदाहरण देखने सुनने मे मिले जिसमे *#Ramcharitmans को अपने हाथों से लिखा है परन्तु उसमे सजाने सवारने के लिए उन्होंने पेज की डिजाइन अपने हिसाब से की लेकिन हाल के दिनों मे जबलपुर निवासी डॉ. संदीप नेमा के हस्तलिखित लिपिबद्ध प्रयास काफी खबरों में इसलिए है क्योंकि प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ उपसहार तक एक लिपि मे पूर्ण व्यवस्थित और बिना किसी त्रुटि और एक जैसी लिपि मे लिपिबद्ध प्रयास अदभुत एवं काबिले तारीफ है जो उनकी गहरी आस्था और समर्पण को दर्शाता हैं ।*
*गोस्वामी तुलसीदास विरचित श्री*#Ramcharitmansको हस्तलिखित कर डॉ संदीप नेमा इस कृति को पूज्य गुरुदेव के साथ एक बार अयोध्या धाम जाकर उनके चरण रज से छिवाने की अभिलाषा है। इस पूरे कार्य में,उनकी जीवन संगिनी श्रीमती दीप्ति नेमा एवं सुपुत्री गरिमा व सुपुत्र यश नेमा का सराहनीय योगदान रहा ।*
*हस्तलिखित रामायण *#Ramcharitmans) इन दुर्लभ और ऐतिहासिक ग्रंथों के संरक्षण, उनके दर्शन और उनके साहित्यिक व सांस्कृतिक महत्व को उजागर करती हैं।निश्चित रूप से डॉ संदीप नेमा बधाई के पात्र है जिन्होंने हमारी संस्कृति सभ्यता सनातन के लिए कुछ किया इस तरह के ग्रंथो की हस्तलिखित कार्य योजना युवा पीढ़ी को धर्म के प्रति खासकर रामचरित मानस के प्रति उत्साहित एवं जागरूक करेंगी। अयोध्या में बन रहे नए मंदिर संग्रहालय और ‘राम कथा संग्रहालय’ में ऐसी कई प्राचीन पांडुलिपियों और हस्तलिखित प्रतियों को आधुनिक तकनीक के साथ प्रदर्शित करने की योजना है।हम चाहेंगे की प्रशासन और धर्म पर्यटन मंत्रालय संदीप नेमा की मेहनत परिश्रम ओर लग्न के मिश्रण प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी*
✍️ *चंद्रशेखर शर्मा*
May be an image of temple and text
#Ramcharitmans के साथ-साथ सुंदरकांड रामरक्षा स्तोत्र का भी लेखन किया है डॉक्टर संदीप नेमा ने